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हवन सामग्री_ नाम, उपयोग और कारण
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हवन सामग्री में क्या-क्या होता है? नाम, उपयोग और कारण

हवन सामग्री में जौ, तिल, जड़ी-बूटियाँ, मसाले और पौधों से निकली सुगंधित राल मिल सकते हैं। मंत्र के बाद मिश्रण का थोड़ा भाग अग्नि में अर्पित किया जाता है। जौ और तिल अर्पण के लिए हैं; लौंग और गुग्गुल सुगंध देते हैं। सूखी लकड़ी अग्नि जलाती है और घी अलग से भी चढ़ता है। सामग्री पूजा के अनुसार बदलती है।

अनाज और बीज: जौ, तिल और चावल

जौ, तिल और चावल मिश्रण में या अलग आहुति में आ सकते हैं। पूजा में इनकी अलग मात्रा लिखी हो तो उस मात्रा का हिसाब अलग रखें।

जौ (Barley): साबुत या कुटे जौ की आहुति दी जा सकती है। पूजा में रूप तय हो तो वही लें। इंद्रजौ जौ नहीं है; वह कुटज नाम के पेड़ का बीज है।

तिल (Sesame): तिल बीज हैं और कुछ हवनों में इनकी आहुति होती है। काले या सफेद तिल का चुनाव अपनी पूजा में लिखे रंग से करें। हर हवन में काले तिल की शर्त नहीं है।

चावल और अक्षत: चावल की आहुति कुछ हवनों में होती है। बिना टूटे कच्चे चावल को अक्षत कहते हैं। पूजा में मूर्ति या कलश पर चढ़ाए अक्षत अग्नि की आहुति नहीं हैं। केवल आग में अर्पित करने के लिए बताए चावल ही अग्नि में डालें।

जड़ी-बूटियाँ: नाम के साथ उनका सही रूप

जड़ी-बूटियों के सूखे तने, जड़ें या पूरे पौधे हवन सामग्री में आ सकते हैं। पूजा की विधि में जो जड़ी-बूटी लिखी हो, वही लें।

  • गिलोय: बेल के सूखे तने का उपयोग होता है।
  • ब्राह्मी: पूरा सूखा पौधा लिया जाता है।
  • शंखपुष्पी: इस नाम से अलग क्षेत्रों में अलग पौधे बिकते हैं। केवल नाम से पौधे की पहचान तय नहीं होती।
  • अश्वगंधा या असगंध: इसकी सूखी जड़ ली जाती है।
  • मुलेठी: इसकी सूखी जड़ ली जाती है।
  • तगर: इसके पौधे की जड़ ली जाती है। अगर एक अलग लकड़ी है।
  • खस: इसकी सुगंधित जड़ ली जाती है। खाने वाला खसखस अलग बीज है।

चंदन और दूसरी लकड़ियाँ

लकड़ी के छोटे टुकड़े आहुति के मिश्रण में हो सकते हैं। अग्नि के लिए सूखी लकड़ी की समिधा अलग ली जाती है।

सफेद चंदन: इसकी लकड़ी में सुगंध होती है। चूरा या छोटा टुकड़ा हवन सामग्री में आ सकता है। लाल चंदन दूसरे पेड़ से मिलता है। “चंदन” अकेला लिखा हो तो उसका रंग तय नहीं होता।

आम और पीपल: इनकी लकड़ी के छोटे कण मिश्रण में मिल सकते हैं। बड़े, सूखे टुकड़े समिधा के रूप में आग में रखे जाते हैं।

अगर और देवदारु: ये लकड़ियों के नाम हैं। कुछ हवन सामग्री में इनके टुकड़े या चूरा आता है। अगर और अगरबत्ती अलग हैं; अगरबत्ती तैयार सुगंधित बत्ती है।

मसाले: लौंग, इलायची, जायफल और जावित्री

नीचे दिए मसाले सुगंध के लिए कुछ मिश्रणों में आते हैं। हर मसाले को हर हवन में डालने की जरूरत नहीं है।

  • लौंग: सूखी फूल की कली। थोड़ी मात्रा में इसकी तेज गंध आती है।
  • इलायची: छोटी और बड़ी इलायची अलग चीजें हैं। पूजा की सूची में जो नाम हो, वही लें। केवल “इलायची” लिखने से उसका प्रकार तय नहीं होता।
  • जायफल: सुगंधित बीज है। कुछ मिश्रणों में इसका कुटा हुआ भाग आता है।
  • जावित्री: जायफल के बीज के बाहर का भाग है। जायफल और जावित्री के नाम अलग-अलग लिखे हों तो एक को दूसरे का विकल्प न समझें।
  • दालचीनी: पेड़ की सूखी, सुगंधित छाल।
  • कपूर कचरी: जमीन के भीतर बढ़ने वाला सुगंधित तना। नाम में कपूर है, पर यह जलाने वाला कपूर नहीं है।

गुग्गुल, लोबान और सांब्रानी

राल कुछ पेड़ों और झाड़ियों से निकलकर जमती है। आग में इसकी गंध के साथ धुआँ भी निकलता है।

गुग्गुल: गुग्गुल के पौधे से निकली सुगंधित राल। कुछ हवन मिश्रणों में इसके दाने आते हैं।

लोबान: धूप के लिए बेची जाने वाली राल। यह नाम एक ही पेड़ की राल तक सीमित नहीं है।

सांब्रानी: कुछ जगह लोबान कही जाने वाली राल का ही नाम है। दोनों नाम लिखे हों तो उन्हें अपने आप दो अलग पदार्थ न गिनें।

मीठी सामग्री, मेवा और नारियल

शक्कर, खाँड़, मिश्री और गुड़ कुछ हवनों में अग्नि को चढ़ाए जाते हैं। पूजा में जो नाम दिया हो, वही लें। ये हर तैयार मिश्रण में नहीं होते।

मुनक्का, किशमिश, बादाम और छुहारा कुछ हवनों में अग्नि को चढ़ाए जाते हैं। सूखा नारियल छोटे टुकड़ों में भी दिया जाता है। हवन की आखिरी आहुति को पूर्णाहुति कहते हैं। इसके लिए अलग गोला या नारियल लिखा हो सकता है। कलश का साबुत नारियल उसी काम का नहीं है।

कमलगट्टा कमल के बीज हैं। खाने वाला मखाना एक अलग पौधे का बीज है। किसी सूची में कमलगट्टा लिखा हो तो मखाना लेकर उसे पूरा न मानें।

घी, समिधा, गोमय और कपूर का काम

  • घी: अग्नि में अलग आहुति के रूप में दिया जा सकता है। कुछ तैयार मिश्रणों में घी पहले से मिला भी होता है।
  • समिधा: सूखी लकड़ी के टुकड़े, जो अग्नि जलाए रखते हैं। मिश्रण में लकड़ी का चूरा अलग बात है।
  • गोमय: सूखा गोबर। बारीक गोमय मिश्रण में हो सकता है; उपला अग्नि का ईंधन है।
  • कपूर: कुछ पूजा विधियों में अग्नि जलाने के लिए लिया जाता है।

Satvikly की 2 तरह की हवन सामग्री

Hawan Samagri, 250 g: इसके विवरण में 20 से अधिक प्राकृतिक सामग्री बताई गई हैं। गिलोय, ब्राह्मी, चंदन, तिल और गुग्गुल प्रमुख उदाहरण हैं। उपयोग के तरीके में घी और समिधा अलग रखने को कहा गया है। हर चीज की मात्रा नहीं बताई गई है।

Mixed Puja Hawan Samagri Dhoop Humad, 250 g: इसमें धूप चिप्स, तिल, घी, जौ और चावल शामिल हैं। यह दूसरा मिश्रण है; दोनों पैकेटों की सामग्री एक जैसी न मानें। पूजा में किसी चीज की अलग आहुति लिखी हो तो उसे अलग रखें।

हवन सामग्री के आम सवाल

क्या गुग्गुल की जगह लोबान डाल सकते हैं?

गुग्गुल और लोबान एक ही राल के नाम नहीं हैं। आपकी पूजा में गुग्गुल लिखा हो तो केवल सुगंध मिलने के आधार पर लोबान को उसका विकल्प न मानें।

क्या हवन सामग्री को प्रसाद समझकर खा सकते हैं?

नहीं। अग्नि में चढ़ाने के लिए बना मिश्रण खाने की चीज नहीं है। प्रसाद अलग खाद्य सामग्री से बनाएँ।

क्या हवन के धुएँ से हवा साफ होती है?

धुएँ को शुद्ध हवा समझकर साँस में न लें। हवन हवादार जगह में करें। दमा या दूसरी साँस की परेशानी वाले व्यक्ति को धुएँ से दूर रखें।

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