माँ लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति खरीदते समय चेहरा देखकर ही चुनाव पूरा न करें। गणेश जी की सूंड, हाथ और दंत देखें। लक्ष्मी जी की हथेलियाँ, कमल और आसन जाँचें। फिर दोनों मूर्तियों का मुख, अनुपात और टूट-फूट साथ देखें।
घर में किसी विशेष स्वरूप की पूजा होती हो, तो उसी का मिलान करें। सामान्य दिवाली पूजन के लिए जोड़ी खरीद रहे हों, तो नीचे की जाँच दुकान और ऑनलाइन तस्वीर, दोनों में करें।
गणेश जी की मूर्ति में क्या देखें
सूंड किस तरफ मुड़ी होनी चाहिए
सामान्य घरेलू पूजा के लिए गणेश जी की अपनी बाईं ओर मुड़ी सूंड वाला स्वरूप प्राथमिक चुनाव रखें। दाईं ओर मुड़ी सूंड वाले स्वरूप के पूजा नियम अपने पुरोहित से पूछें। इस चुनाव को अपनी पारिवारिक पूजा परंपरा से मिलाएँ। सूंड और पूजा का संदर्भ
बाईं ओर का अर्थ गणेश जी की बाईं ओर है। आप मूर्ति के सामने खड़े हों, तो यह आपको अपनी दाईं तरफ दिखेगी। खरीदार की बाईं तरफ मुड़ी सूंड को गणेश जी की बाईं सूंड समझने की गलती न करें। सूंड की दिशा की पहचान
मूर्ति को सीधा सामने रखकर सूंड का पूरा घुमाव देखें। ऑनलाइन तस्वीर पलटकर दिखाई गई हो सकती है। सामने और दोनों तरफ की साफ तस्वीर माँगें। सूंड में कई मोड़ हों, तो विक्रेता से चुने हुए स्वरूप की पुष्टि लें।
हाथ और आशीर्वाद की मुद्रा
चार भुजाओं वाला स्वरूप खरीद रहे हों, तो चारों हाथ दिखाई देने चाहिए। पीछे के हाथ सजावट या मुकुट से छिपे हों, तो बगल की तस्वीर देखें। उँगली, कलाई और हाथ में पकड़े प्रतीक को अलग जाँचें।
आशीर्वाद देने वाला हाथ हो, तो खुली हथेली की मुद्रा स्पष्ट दिखनी चाहिए। हथेली सामने की ओर उठी हो, तो वह अभय मुद्रा है। इसका संकेत संरक्षण और निर्भयता है। हाथ में वस्तु पकड़ने के लिए मुड़ी उँगलियों को बंद आशीर्वाद हाथ न समझें। हाथ की मुद्रा की पहचान
मोदक या लड्डू, पाश, अंकुश, दंत और कुल्हाड़ी जैसे प्रतीक स्वरूप के अनुसार बदलते हैं। पाश फंदे जैसा और अंकुश मुड़े सिरे वाला औजार दिखता है। खरीदे जा रहे मॉडल में हाथ का प्रतीक पूरा है या उसका सिरा टूटा है, यह देखें। गणेश जी के स्वरूप और प्रतीक
मोदक और मूषक
मोदक हाथ में है, पात्र में है या सूंड के पास, यह देखें। उसकी स्थिति चुने हुए स्वरूप से मिलाएँ। सूंड का मोदक छूना हर गणेश प्रतिमा में जरूरी मानकर चुनाव न करें।
मूषक, यानी चूहा, गणेश जी का वाहन है। सेट की तस्वीर में वह दिख रहा हो, तो पूछें कि आधार पर बना है या अलग मिलेगा। अलग मिलने वाली छोटी प्रतिमा पैकेज में शामिल है या नहीं, यह भी लिखवा लें। गणेश जी के वाहन की पहचान
एकदंत और वास्तविक टूट-फूट
गणेश जी के एकदंत स्वरूप में एक दंत टूटा दर्शाया जा सकता है। दंत हाथ में भी दिख सकता है। इसे देखकर मूर्ति को खंडित समझने से पहले उसी मॉडल की मूल तस्वीर मिलाएँ। एकदंत स्वरूप
दंत के पास दरार, चिपका जोड़ या गायब टुकड़ा हो, तो उसकी स्थिति पूछें। सूंड का सिरा, कान का किनारा और मुकुट भी पास से देखें। एकदंत स्वरूप होने से दूसरे हिस्सों की क्षति स्वीकार नहीं हो जाती।
बैठे हुए स्वरूप का आसन
बैठे गणेश जी लेते समय दोनों पैरों और पूरे आसन को देखें। एक पैर नीचे और दूसरा मुड़ा हुआ हो सकता है। दोनों पैर एक ही तरह मुड़े हों, यह सभी बैठे स्वरूपों की शर्त नहीं है। बैठने की मुद्राएँ
गोद, घुटने और आसन के पास दरार जाँचें। पैर पर दिख रही रेखा वस्त्र का हिस्सा है या टूटा जोड़, यह पास से देखें। समतल सतह पर रखने पर मूर्ति स्थिर रहनी चाहिए।
लक्ष्मी माता की मूर्ति में क्या देखें
खुली हथेली में अभय और वरद मुद्रा
प्रचलित चार भुजाओं वाली लक्ष्मी प्रतिमा में ऊपर के हाथों में कमल होते हैं। नीचे के हाथ अभय और वरद मुद्रा में दिख सकते हैं। खरीदते समय केवल हाथ खुला होना नहीं, उसकी दिशा भी देखें। लक्ष्मी जी के हाथों का स्वरूप
अभय मुद्रा में हथेली सामने की ओर उठी होती है। वरद मुद्रा में हाथ नीचे की ओर होता है और उँगलियाँ नीचे की ओर संकेत करती हैं। अभय संरक्षण और वरद वरदान देने का संकेत है। दोनों मुद्राओं को एक ही आशीर्वाद मुद्रा कहकर उनका अंतर न छोड़ें। अभय और वरद की पहचान
खुली हथेली पर उँगलियाँ, अंगूठा और किनारे पूरे दिखें। मोटे पेंट या सजावट से मुद्रा छिप रही हो, तो नजदीक की तस्वीर देखें। कमल का डंठल पकड़ने वाले हाथ की पकड़ को बंद मुट्ठी वाला दोष न मानें।
कमल और हाथ से गिरते सिक्के
हाथ में कमल बना हो, तो फूल और डंठल दोनों जाँचें। डंठल हाथ से जुड़ने की जगह पर टूटा या चिपकाया तो नहीं है, यह देखें। फूल की बाहरी पंखुड़ियाँ छोटी तस्वीर में छिप सकती हैं।
कुछ प्रतिमाओं में हथेली से सिक्के गिरते दिखते हैं। यह लक्ष्मी जी की समृद्धि देने वाली छवि का हिस्सा है। सिक्के वाला मॉडल चुनें, तो पूरी धारा और नीचे का पात्र देखें। हर लक्ष्मी स्वरूप में सिक्के बने हों, यह खरीद की अनिवार्य शर्त न बनाएं। खुली हथेली और सिक्कों का चित्रण
कमल का आसन और उल्लू का अंतर
कमल पर बैठी लक्ष्मी जी चाहिए, तो नीचे का आसन स्पष्ट देखें। वह केवल गोल चौकी है या कमल की पंखुड़ियों वाला आसन, यह पहचानें। देवी की बैठने की मुद्रा और कमल का आधार दोनों पूरी तस्वीर में दिखने चाहिए।
उल्लू साथ बना होना और लक्ष्मी जी का उल्लू पर बैठना अलग बातें हैं। उल्लू लक्ष्मी जी के वाहन के रूप में दिखाया जाता है। मूर्ति में देवी किस पर विराजमान हैं, यह नीचे और बगल से देखें। लक्ष्मी जी का आसन और वाहन
आपके दिवाली पूजन में कमल पर बैठी लक्ष्मी का स्वरूप लिया जाता है, तो वही चुनें। बगल में बने उल्लू को देखकर आसन का अनुमान न लगाएं। उल्लू पर विराजमान रूप मिले, तो उसे उसी परिचित कमल आसन वाला मॉडल समझकर न खरीदें।
हाथी और दूसरे स्वरूप
लक्ष्मी जी के दोनों ओर हाथी दिख रहे हों, तो गजलक्ष्मी स्वरूप देखें। हाथों की संख्या और पकड़े प्रतीक भी स्वरूप पहचानने में मदद करते हैं। चार हाथ वाली परिचित प्रतिमा की जगह अधिक भुजाओं वाला रूप मिले, तो उसका नाम पूछें। गजलक्ष्मी
विशेष स्वरूप चुनते समय घर की पूजा वाली प्रतिमा से मिलाएँ। केवल लक्ष्मी लिखा होना पूरे स्वरूप का विवरण नहीं है। तस्वीर, नाम और हाथों के प्रतीक साथ देखकर चुनाव करें।
दोनों का मुख और आकार साथ मिलाएँ
सामने से दर्शन के लिए जोड़ी ले रहे हैं, तो दोनों का मुख आगे की ओर वाला सेट चुनें। दोनों मूर्तियों के आधार को एक दिशा में रखकर देखें। लक्ष्मी जी का चेहरा सीधा और गणेश जी का चेहरा बहुत अधिक बगल में मुड़ा हो, तो दूसरी जोड़ी से तुलना करें।
चेहरे की दिशा और आँखों की पुतलियों की दिशा अलग देखें। आँखें, भौंहें और चेहरे की रेखाएँ स्पष्ट हों। पेंट की गड़बड़ी से एक आँख दूसरी दिशा में दिख रही हो, तो उसी वस्तु की नजदीक की तस्वीर लें। मुकुट या सजावट चेहरे को ढक रही हो, तो सामने के दर्शन का ध्यान रखें।
दोनों की ऊँचाई मुकुट और आसन सहित मिलाएँ। साथ रखकर सिर, शरीर और आसन का अनुपात भी देखें। ऊँचा मुकुट होने से कुल ऊँचाई बराबर लग सकती है, जबकि एक प्रतिमा का शरीर बहुत छोटा हो।
सामने देखती हुई और संतुलित अनुपात वाली जोड़ी दर्शन तथा सजावट के लिए व्यावहारिक चुनाव है। दोनों की आँखें बिल्कुल सीधी हों या ऊँचाई हर हाल में समान हो, इसे सभी परंपराओं का धार्मिक नियम न बनाएं। परिवार में विशेष माप या मुद्रा का नियम हो, तो उसका पालन करें।
अलग रखी जा सकने वाली मूर्तियाँ चाहिए, तो दोनों को स्वतंत्र उठाकर रखने की पुष्टि लें। एक साझा आधार पर लगे सेट में दूरी और क्रम पहले से तय हो सकते हैं। तस्वीर में दोनों साथ दिखने से वे अलग होने योग्य हैं, यह तय नहीं होता।
पूरे स्वरूप का माप मंदिर की जगह से मिलाएँ
मूर्ति रखने की जगह की चौड़ाई, गहराई और ऊँचाई लिखें। फिर प्रतिमा का पूरा माप उससे मिलाएं। केवल मुकुट की ऊँचाई या आधार की चौड़ाई पर्याप्त नहीं है।
विक्रेता से ये माप माँगें:
- ऊँचाई: आसन से मुकुट के सबसे ऊपरी भाग तक।
- चौड़ाई: हाथ, सूंड और दूसरे बाहर निकले हिस्सों सहित।
- गहराई: सामने से पीछे के सबसे बाहरी हिस्से तक।
- आधार: नीचे रखे जाने वाले हिस्से की चौड़ाई और गहराई।
मंदिर के ऊपर पट्टी या छत हो, तो उपलब्ध ऊँचाई देखें। मूर्ति रखने और उठाने के लिए भी जगह चाहिए। दीवार से बाहर निकले हिस्से दबें नहीं, यह खरीद से पहले जाँचें।
इंच और सेंटीमीटर का मिलान करें। 1 इंच बराबर 2.54 सेमी होता है। अलग जोड़ी में प्रत्येक मूर्ति का माप पूछें। पूरे बॉक्स की ऊँचाई को मूर्ति की ऊँचाई न मानें।
सामग्री और अभिषेक की अनुमति पूछें
स्वरूप देखने के बाद मूल सामग्री और ऊपर की फिनिश पूछें। सुनहरा रंग, सिल्वर लुक और मार्बल लुक केवल रूप बताते हैं। पदार्थ का नाम बिल या लिखित विवरण में लें।
- पीतल: पूरी मूर्ति पीतल की है या पीतल जैसी फिनिश है, यह पूछें। ठोस और खोखली ढलाई का विवरण अलग लें। रेजिन पर पीतल जैसी फिनिश भी मिलती है।
- संगमरमर: ठोस पत्थर और मार्बल डस्ट का अंतर पूछें। मार्बल डस्ट और रेजिन के मिश्रण से बनी प्रतिमा के सफाई निर्देश अलग हो सकते हैं।
- चांदी: शुद्धता, केवल चांदी का वजन और ठोस या खोखली बनावट पूछें। प्लेटिंग वाले उत्पाद का पूरा वजन चांदी का वजन नहीं है।
- मिट्टी: प्राकृतिक मिट्टी, पकाई गई मिट्टी, पीओपी और रंग का विवरण लें। विसर्जन के लिए खरीद हो, तो स्थानीय व्यवस्था के अनुसार सामग्री चुनें।
पूजा में पानी, दूध या पंचामृत से अभिषेक होगा, तो उसकी अनुमति खरीद से पहले पूछें। सूखे कपड़े और गीले कपड़े से सफाई, धोना तथा डुबोना अलग उपयोग हैं। किसी एक की अनुमति से बाकी उपयोगों की अनुमति न मानें।
रंग या प्लेटिंग वाली मूर्ति के लिए विशेष निर्देश पढ़ें। पूजा के लिए बेचे जा रहे रेजिन और गोल्ड प्लेटिंग वाले उत्पाद पर भी पानी या दूध की मनाही हो सकती है। अभिषेक जरूरी हो, तो उसके अनुकूल मूर्ति चुनें।
सूंड हाथ कमल और आधार की स्थिति जाँचें
मूर्ति की स्थिति सामने, दोनों तरफ, पीछे और नीचे से देखें। दुकान में अनुमति लेकर उसे आधार से संभालें। सूंड या मुकुट पकड़कर उठाने से जाँच पूरी नहीं होगी।
इन संकेतों पर ध्यान दें:
- पतले हिस्से के पास दिखाई देती दरार।
- उँगली, कमल की पंखुड़ी या किनारे का गायब भाग।
- रंग उखड़ना या पेंट के नीचे अलग बनावट।
- ऐसा जोड़ जो मूल मॉडल की तस्वीर से अलग दिखे।
- नीचे का टूटा या असमतल आधार।
हर रेखा को दरार न मानें। कुछ रेखाएँ सांचे या निर्माण के जोड़ की हो सकती हैं। स्पष्ट न हो, तो पूछें कि वह निर्माण का हिस्सा है या बाद में सुधारा गया है।
समतल सतह पर आधार की स्थिरता देखें। मूर्ति डगमगाए, तो कारण पूछें और दूसरी वस्तु से तुलना करें। नीचे कपड़ा रखकर दोष छिपाने की सलाह पर चुनाव पूरा न करें।
हाथ से बनी मूर्ति में हल्की रंग भिन्नता हो सकती है। उसे टूटे या गायब हिस्से के बराबर न मानें। लेकिन वास्तविक क्षति को सिर्फ हस्तशिल्प का अंतर बताकर अनदेखा न करें।
पहले से जुड़ा या चिपकाया भाग हो, तो उसका विवरण लें। तस्वीर में जोड़ स्पष्ट न हो, तो नजदीक की फोटो माँगें। नई वस्तु की स्थिति पर जवाब न मिले, तो दूसरी वस्तु देखें।
बिल में मूर्ति और सामग्री का विवरण लें
बिल में दोनों प्रतिमाओं की संख्या, सामग्री और आकार देखें। ढुलाई तथा पैकिंग सहित अंतिम भुगतान पूछें। केवल एक जैसी ऊँचाई के आधार पर अलग सामग्री वाली मूर्तियों की कीमत न मिलाएँ।
हॉलमार्क वाली चांदी की मूर्ति में शुद्धता, नेट चांदी वजन और दोनों स्वतंत्र वस्तुओं का अंकन देखें। HUID वाला उत्पाद हो, तो BIS Care में उसका विवरण मिलाएँ। बॉक्स और दूसरे आधार का वजन चांदी के वजन से अलग पूछें। हॉलमार्क और बिल की जाँच
ऑनलाइन तस्वीर डिलीवरी और शिकायत की शर्तें पढ़ें
ऑनलाइन ऑर्डर में चुना हुआ मॉडल और आकार पहले मिलाएं। मुख्य तस्वीर दूसरे बड़े मॉडल की हो सकती है। सामग्री वाले हिस्से, विकल्प और पैकेज की मात्रा साथ पढ़ें।
शीर्षक में पीतल और विवरण में रेजिन लिखा हो, तो पूछें। केवल मार्बल लुक लिखा हो, तो मूल पदार्थ माँगें। विरोधी जानकारी पर सही विवरण मिलने से पहले ऑर्डर पूरा न करें।
पूछें कि ऑर्डर कब भेजेंगे और आपके पिनकोड पर कब पहुँचने का अनुमान है। दोनों समय अलग हैं। त्योहार से पहले जाँच और बदलने का समय भी रखें।
वापसी, बदलने और धन वापसी की शर्तें अलग पढ़ें। पसंद बदलना और टूटी वस्तु मिलना अलग मामले हैं। गलत सामग्री या आकार मिलने की प्रक्रिया भी पूछें।
डिलीवरी पर मॉडल, मात्रा और स्थिति का ऑर्डर से मिलान करें। अंतर दिखे, तो तस्वीर और बिल सहित लिखित सूचना दें। शिकायत का संपर्क और उसकी सूचना अवधि खरीद से पहले देख लें।
दुकानदार से ये जरूरी सवाल पूछें
स्वरूप देखने के बाद चुनी हुई मूर्ति की जानकारी लिखित में लें। ऑनलाइन खरीद में उत्तर उसी मॉडल और आकार के लिए माँगें।
- चुने हुए गणेश स्वरूप की सूंड गणेश जी की अपनी बाईं ओर मुड़ी है?
- लक्ष्मी जी किस आसन पर हैं और हाथों की साफ तस्वीर मिल सकती है?
- प्रत्येक प्रतिमा और आधार का पूरा माप कितना है?
- मूल सामग्री क्या है और ऊपर कौन सी फिनिश है?
- पैकेज में कौन सी प्रतिमाएँ और कितना सामान मिलेगा?
- गीले कपड़े, पानी और अभिषेक की क्या अनुमति है?
- कोई भाग बाद में जोड़ा या सुधारा गया है?
- चुने हुए मॉडल की पीछे और नीचे की तस्वीर मिल सकती है?
- कब भेजेंगे और मेरे पिनकोड पर कब पहुँचने का अनुमान है?
- गलत या टूटी वस्तु मिले, तो संपर्क और प्रक्रिया क्या है?
चेहरा, सूंड, हाथ, आसन और मूर्ति की स्थिति पसंद आने पर माप तथा सामग्री मिलाएँ। पूजा में अभिषेक होता हो, तो उसकी अनुमति लें। चुनी हुई वस्तु की जरूरी जानकारी स्पष्ट होने पर ही खरीद पूरी करें।