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दीवाली 2026 पर लक्ष्मी पूजा कब करें? पूजा की तारीख और शुभ मुहूर्त
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दीवाली 2026 पर लक्ष्मी पूजा कब करें? पूजा की तारीख और शुभ मुहूर्त

दीवाली 2026 पर लक्ष्मी पूजा रविवार, 8 नवंबर को होगी। नई दिल्ली में पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:54 से 7:50 बजे तक है। दूसरे शहरों के समय नीचे तालिका में दिए हैं। सभी समय भारतीय मानक समय के अनुसार हैं।

द्रिक पंचांग के अनुसार, अमावस्या 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे शुरू होगी। यह 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे समाप्त होगी। लक्ष्मी पूजा के लिए शाम के प्रदोष काल में अमावस्या देखी जाती है। इस वर्ष यह संयोग 8 नवंबर को है।

लक्ष्मी पूजा 2026 का शहरवार शुभ मुहूर्त

नीचे दिए सभी मुहूर्त रविवार, 8 नवंबर 2026 के हैं। तालिका में शाम का लक्ष्मी पूजा मुहूर्त दिया है।

शहर लक्ष्मी पूजा का समय
नई दिल्ली शाम 5:54 से 7:50 बजे
नोएडा शाम 5:54 से 7:49 बजे
गुरुग्राम शाम 5:55 से 7:51 बजे
चंडीगढ़ शाम 5:52 से 7:46 बजे
जयपुर शाम 6:03 से 7:59 बजे
अहमदाबाद शाम 6:22 से 8:20 बजे
मुंबई शाम 6:27 से 8:27 बजे
पुणे शाम 6:24 से 8:24 बजे
कोलकाता शाम 5:20 से 7:18 बजे
हैदराबाद शाम 6:07 से 8:08 बजे
चेन्नई शाम 6:07 से 8:09 बजे
बेंगलुरु शाम 6:17 से 8:20 बजे

स्रोत: द्रिक पंचांग। सभी समय भारतीय मानक समय, IST में हैं। समयों की जाँच 15 अक्टूबर 2026 को की गई है।

परिवार अलग-अलग शहरों में हो: इन 12 शहरों में शाम 6:27 से 7:18 बजे का समय साझा है, जिसे वीडियो कॉल पर पूजा के लिए देखा जा सकता है। यह तालिका की तुलना से निकला 51 मिनट का अंतराल है, अलग से निर्धारित धार्मिक मुहूर्त नहीं।

अपना शहर सूची में न मिले तो पंचांग में स्थान चुनें। पास के शहर का समय लेने से पहले स्थानीय मुहूर्त जाँचें।

अमावस्या 9 नवंबर तक है, फिर पूजा 8 नवंबर को क्यों?

8 नवंबर की शाम अमावस्या रहेगी। 9 नवंबर को यह दोपहर में समाप्त हो जाएगी। इसलिए लक्ष्मी पूजा के लिए अमावस्या वाली शाम 8 नवंबर को मिलेगी।

पर्व की तारीख तय करते समय केवल सूर्योदय की तिथि नहीं देखते। लक्ष्मी पूजा में प्रदोष के समय अमावस्या का होना महत्त्वपूर्ण है। इसी नियम से 2026 में पूजा की तारीख 8 नवंबर बनती है।

धर्मसिन्धु में भी प्रदोष के समय लक्ष्मी पूजन का उल्लेख है। कामकोटि पीठ पर उपलब्ध इसके संक्षिप्त अनुवाद में यह विधान मिलता है।

प्रदोष काल और वृषभ लग्न के समय अलग क्यों हैं?

प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद रात का शुरुआती भाग है। वृषभ लग्न उस समय को कहते हैं, जब पूर्वी क्षितिज पर वृषभ राशि उदित होती है। लग्न का समय स्थान के अनुसार बदलता है।

द्रिक पंचांग मुख्य पूजा मुहूर्त में तीन बातें देखता है: अमावस्या, प्रदोष काल और स्थिर लग्न। वृषभ एक स्थिर लग्न है। नई दिल्ली में इनका मेल इस प्रकार है:

  • प्रदोष काल: शाम 5:31 से 8:09 बजे।
  • वृषभ लग्न: शाम 5:54 से 7:50 बजे।
  • लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: शाम 5:54 से 7:50 बजे।

यहाँ प्रदोष शुरू होने के 23 मिनट बाद वृषभ लग्न शुरू होगा। इसलिए शाम 5:31 बजे प्रदोष की शुरुआत है, तालिका में दिए पूजा मुहूर्त की नहीं।

यह वृषभ लग्न पूजा के समय से जुड़ा है। इसमें पूजा करने के लिए आपकी जन्मराशि वृषभ होना जरूरी नहीं है।

सुबह और दोपहर के मुहूर्त दिखें तो कौन-सा समय चुनें?

घर की लक्ष्मी पूजा के लिए ऊपर दिया शाम का मुहूर्त चुनें। सुबह अमावस्या शुरू होने का अर्थ यह नहीं कि मुख्य पूजन उसी समय करना है।

दिन के मुहूर्त अलग पद्धतियों से भी दिए जाते हैं। किसी सूची में चौघड़िया लिखा हो सकता है, तो दूसरी में स्थिर लग्न। इसलिए समय के साथ उसका नाम भी पढ़ें। “लाभ” या “अमृत” चौघड़िया को प्रदोष और वृषभ लग्न वाला मुहूर्त समझकर न चुनें।

शाम को पूजा संभव न हो तो कुछ पंचांग दूसरे स्थिर लग्न का विकल्प देते हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार, ऐसा समय अमावस्या समाप्त होने से पहले मिलना चाहिए। दिन में कोई भी सुविधाजनक समय चुन लेना इस विकल्प के समान नहीं है।

दुकान के बहीखातों का पूजन, जिसे चोपड़ा पूजन कहते हैं, घर की पूजा से अलग रखा गया हो सकता है। दोनों के लिए अलग समय बताया गया हो तो पुरोहित से उसका कारण पूछें।

क्या लक्ष्मी पूजा के लिए आधी रात तक रुकना जरूरी है?

घर में प्रदोष के समय लक्ष्मी पूजा करने के लिए आधी रात तक रुकना जरूरी नहीं है। प्रदोष में पूजन का धार्मिक विधान उपलब्ध है। विशेष रात्रि पूजन का समय और विधि अलग हो सकती है।

रात के मुहूर्त में महानिशीथ और सिंह लग्न का नाम मिलता है। महानिशीथ रात के मध्य का एक निर्धारित काल है, जबकि सिंह एक लग्न है। दोनों का समय हमेशा एक साथ नहीं पड़ता।

मुंबई में 8 और 9 नवंबर के बीच की रात:

  • महानिशीथ काल: रात 11:57 से 12:48 बजे तक।
  • सिंह लग्न: रात 12:53 से 3:01 बजे तक।

आधी रात के बाद की तारीख 9 नवंबर होगी। यहाँ महानिशीथ समाप्त होने के पाँच मिनट बाद सिंह लग्न शुरू होगा। इसलिए इन दोनों को एक ही मुहूर्त नहीं माना जा सकता।

शाम का मुहूर्त छूट जाए तो क्या करें?

पहले अपने शहर में प्रदोष समाप्त होने का समय देखें। वृषभ लग्न और प्रदोष का अंत एक ही समय पर होना जरूरी नहीं है।

वृषभ लग्न समाप्त हो गया, लेकिन प्रदोष बाकी है

नई दिल्ली में वृषभ लग्न शाम 7:50 बजे समाप्त होगा। प्रदोष काल 8:09 बजे तक रहेगा। ये अतिरिक्त 19 मिनट प्रदोष के हैं; इन्हें तालिका वाले मुहूर्त का विस्तार न समझें। शेष प्रदोष में अपनी पूजा-विधि के अनुसार पूजन के बारे में पुरोहित से पूछें।

पूरा प्रदोष समाप्त हो गया है

अमावस्या समाप्त होने से पहले किसी दूसरे स्थिर लग्न का विकल्प देखा जा सकता है। द्रिक पंचांग की लग्न संबंधी सलाह में यह विकल्प मिलता है। समय चुनते हुए यह भी पूछें कि उस समय कौन-सी पूजा-विधि अपनानी है।

समय पूछते हुए अपना शहर, उपलब्ध समय और पूजा का प्रकार बताएँ। दूसरे शहर का देर से समाप्त होने वाला मुहूर्त अपने स्थान पर लागू न करें।

पूजा शुरू करने और पूरी करने का समय कैसे तय करें?

पूजा की अवधि पहले तय करें, ताकि मुहूर्त के अंतिम मिनट में तैयारी शुरू न हो। पुरोहित आ रहे हों तो उनसे पूछें कि मुख्य पूजन में कितना समय लगेगा।

तैयारी के लिए ये काम पहले पूरे कर लें:

  • चौकी और सामग्री: मूर्तियाँ, पूजा की थाली और प्रसाद पहले व्यवस्थित कर लें।
  • मंत्र और आरती: जिन पाठों का उपयोग करना है, उन्हें तैयार रखें।
  • परिवार का समय: सभी सदस्यों को पूजा शुरू करने का समय बता दें।

मुहूर्त की तालिका से यह तय नहीं होता कि केवल संकल्प उसी समय करना है या पूरा अनुष्ठान। संकल्प, मुख्य पूजन और आरती के समय अपनी पूजा-विधि के अनुसार तय करें। अंतिम मिनट में शुरुआत करने के बजाय पूजा के लिए पर्याप्त समय रखें।

लक्ष्मी पूजा के समय से जुड़े अन्य सवाल

विदेश में क्या भारत वाला मुहूर्त मान सकते हैं?

भारत के मुहूर्त को केवल स्थानीय घड़ी के समय में बदलना पर्याप्त नहीं है। पूजा की तारीख और मुहूर्त में स्थानीय सूर्यास्त भी देखा जाता है।

अमावस्या एक ही क्षण शुरू होती है, लेकिन देशों की घड़ियाँ अलग समय दिखाती हैं। स्थानीय शाम भी अलग होती है। इसलिए विदेश में अपने शहर का पंचांग देखें।

दो पंचांगों में कुछ मिनट का अंतर हो तो क्या करें?

पहले शहर, वर्ष और समय-क्षेत्र मिलाएँ। फिर देखें कि दोनों में लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त दिया है या एक में पूरा प्रदोष काल।

ये विवरण समान होने पर भी अंतर मिले तो अपनी परंपरा में स्वीकार पंचांग अपनाएँ। एक स्रोत से शुरुआत और दूसरे से समाप्ति का समय न लें। इस लेख की शहरवार तालिका द्रिक पंचांग पर आधारित है।

खगोलीय कैलेंडर में New Moon 9 नवंबर को क्यों है?

New Moon एक निश्चित खगोलीय क्षण है। अमावस्या तिथि की एक अवधि होती है, जिसका आरंभ और अंत होता है।

खगोलविद फ्रेड एस्पेनाक की तालिका में नवंबर 2026 का New Moon 9 नवंबर को है। इससे दीवाली की पूजा 9 नवंबर को तय नहीं हो जाती। लक्ष्मी पूजा की तारीख अमावस्या तिथि और प्रदोष काल को साथ देखकर चुनी जाती है।

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