दीवाली पूजा किस दिशा में करें? बैठने और मूर्ति रखने की दिशा
दीवाली पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा करते समय अपना चेहरा पूर्व या उत्तर की ओर रखें। मूर्तियाँ आपके सामने हों और उनका मुख आपकी ओर हो। आप पूर्व की ओर देखकर बैठेंगे तो मूर्तियों का मुख पश्चिम होगा। उत्तर की ओर देखकर बैठेंगे तो मूर्तियों का मुख दक्षिण होगा।
चौकी सजाने से पहले दिशा पहचान लें और आसन की जगह तय करें। पूजा की जगह उत्तर-पूर्व में होने का अर्थ यह नहीं कि आपका चेहरा भी उत्तर-पूर्व की ओर होना चाहिए।
पहले पहचानें कि आपका चेहरा किस दिशा में होगा
जहाँ पूजा के लिए बैठना है, वहीं से दिशा जाँचें। घर के मुख्य दरवाजे की दिशा से आपकी बैठने की दिशा तय नहीं होती।
सामने का सिरा जाँचें
फोन में कंपास हो तो इन तीन चरणों से दिशा देखें:
- 1फोन की स्क्रीन ऊपर रखें। फोन सपाट पकड़ें और उसका ऊपरी सिरा सामने करें।
- 2पूर्व या उत्तर पहचानें। कंपास में E पूर्व और N उत्तर दिखाता है।
- 3उसी ओर चेहरा करके बैठें। पूरे शरीर की बैठक उस ओर रखें, केवल गर्दन न मोड़ें।
चुंबक या चुंबकीय सामान के पास कंपास की दिशा प्रभावित हो सकती है। उनसे दूर होकर दिशा देखें और फिर चौकी सजाएँ।
चौकी के किस ओर बैठें और मूर्तियों का मुख कहाँ रखें?
कमरे के पूर्वी हिस्से में बैठना और पूर्व की ओर देखना अलग हैं। आपकी बैठने की दिशा आपके चेहरे से तय होगी। लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियाँ ठीक सामने रखने पर व्यवस्था इस तरह बनेगी:
मान लीजिए, चौकी पूर्व की दीवार के पास है। मूर्तियों की पीठ दीवार की ओर करें और उनके सामने बैठें। इस स्थिति में आप पूर्व की ओर देखेंगे। पूर्व की दीवार के पास रखी मूर्ति का मुख यहाँ पश्चिम होगा।
आसन इतनी दूरी पर बिछाएँ कि फूल और भोग चढ़ा सकें। सामान तक पहुँचने के लिए बार-बार उठना पड़े तो पूजा शुरू करने से पहले चौकी या आसन थोड़ा पास कर लें।
पूजा की जगह उत्तर-पूर्व में हो तो कैसे बैठें?
घर के उत्तर-पूर्व हिस्से को ईशान कोण कहते हैं। पूजा की जगह के लिए इस हिस्से का उल्लेख मत्स्यपुराण 256.33 में है। यह घर में देवस्थान की जगह बताता है।
अगर चौकी इसी कोने में रख रहे हैं, तो उसके सामने आसन के लिए जगह छोड़ें। चौकी को कोने की ओर तिरछा रखने से पहले देखें कि आप किस ओर चेहरा करके बैठ पाएँगे। पूर्व या उत्तर की ओर बैठने के लिए चौकी की जगह और मूर्तियों का मुख उसी अनुसार तय करें।
ईशान कोण में चौकी रखने भर से आपके चेहरे की दिशा तय नहीं होती। घर में पूजा कहाँ होगी और आप किस ओर देखेंगे, दोनों बातों को अलग देखें।
चौकी
चेहरा पूर्व / उत्तर
दीवाली की रात पूजा करें तो पूर्व चुनें या उत्तर?
शाम की लक्ष्मी पूजा के लिए पूर्व या उत्तर की ओर बैठ सकते हैं। महालक्ष्मी पूजन की विधि में शाम की पूजा के साथ दोनों दिशाओं का विकल्प मिलता है। पूर्व को पहला और उत्तर को कम अच्छा विकल्प मानने की जरूरत नहीं है।
अगर घर में रात की पूजा उत्तर की ओर बैठकर होती है, तो वही तरीका अपनाएँ। शिवपुराण, विद्येश्वरसंहिता 21.53 में रात के देवकार्य उत्तर की ओर मुख करके करने का निर्देश है। यह वचन मिट्टी के शिवलिंग की पूजा वाले अध्याय में आता है।
रात में उत्तर की ओर बैठने का धार्मिक आधार है। शाम की महालक्ष्मी पूजा में पूर्व की ओर बैठने का निर्देश भी उपलब्ध है।
घर में मूर्तियाँ पहले से स्थापित हों तो क्या करें?
प्रतिष्ठित प्रतिमा
विधिपूर्वक स्थायी रूप से स्थापित प्रतिमा की पूजा कर रहे हों तो उसके सामने बैठें। श्रीमद्भागवत 11.27.19 के अनुवाद और व्याख्या में ऐसी प्रतिमा के सामने पूजा करने का निर्देश है।
मंदिर की अलमारी
दीवार से जुड़ी मंदिर की अलमारी और प्रतिमा की स्थायी धार्मिक स्थापना अलग बातें हैं। अलमारी में मूर्ति रखने भर से उसकी स्थायी धार्मिक स्थापना नहीं हो जाती।
संदेह हो तो पूछें
अगर आपको पता नहीं कि घर की प्रतिमा की स्थायी स्थापना हुई है या नहीं, तो परिवार के जानकार सदस्य से पूछें। उसके अनुसार प्रतिमा के सामने पूजा करने या अलग चौकी लगाने की व्यवस्था तय करें।
पूर्व या उत्तर की ओर बैठने की जगह न हो तो क्या करें?
पहले चौकी खिसकाएँ
अलग चौकी लगा रहे हों तो पहले उसकी जगह बदलकर देखें। चौकी दीवार से सटाकर रखना जरूरी नहीं; थोड़ा आगे रखने से आसन के लिए जगह मिल सकती है। मूर्तियों का मुख अपनी ओर रखते हुए बैठने की जगह चुनें।
उत्तर की ओर बैठें
पूर्व की ओर बैठना संभव न हो, लेकिन उत्तर की ओर जगह हो, तो उत्तर चुन सकते हैं। इसके लिए कमरे का उत्तर-पूर्व कोना होना जरूरी नहीं है। चेहरे की दिशा और पूजा की जगह का अंतर यहाँ भी लागू होगा।
घर की व्यवस्था न बदलें
दोनों दिशाओं में बैठना संभव न हो तो घर की पूजा कराने वाले पंडित को कमरे की व्यवस्था बताएँ। स्थायी रूप से स्थापित प्रतिमा हो तो उसके सामने बैठने वाला निर्देश ध्यान में रखें। केवल सामान्य दिशा-सलाह पढ़कर घर की स्थापित पूजा-व्यवस्था बदलने का निर्णय न लें।
मूर्तियों, तस्वीर और परिवार के बैठने से जुड़े सवाल
उत्तर की ओर बैठने पर मूर्तियों का मुख दक्षिण होगा, क्या यह गलत है?
जब आप उत्तर की ओर देखकर मूर्तियों के सामने बैठते हैं, तो उनका मुख दक्षिण होगा। उत्तर की ओर बैठकर पूजा करने के निर्देश में आमने-सामने की यही व्यवस्था बनती है।
यदि आपकी पारिवारिक पूजा-पद्धति में मूर्तियों के मुख के लिए अलग निर्देश है, तो बैठने की दिशा भी उसी के साथ तय करें। “आप उत्तर की ओर बैठें” और “सामने की मूर्तियों का मुख दक्षिण न हो” को एक साथ लागू नहीं कर सकते।
लक्ष्मी-गणेश की तस्वीर से पूजा करें तो कैसे रखें?
तस्वीर का सामने वाला भाग अपनी ओर रखें, ताकि बैठकर दर्शन कर सकें। उसे मजबूत सहारे पर टिकाएँ या दीवार पर ठीक से लगाएँ।
तस्वीर की ऊँचाई आसन पर बैठकर देखें। उसे देखने के लिए गर्दन बहुत ऊपर उठानी या बगल में मोड़नी न पड़े।
पूजा में परिवार के बाकी सदस्य कहाँ बैठें?
मुख्य पूजन करने वाले का आसन पहले बिछाएँ। बाकी सदस्यों को उसके पास ऐसी जगह दें, जहाँ से मूर्तियाँ दिखें और आरती में शामिल हो सकें।
फूल, भोग और पूजा की थाली रखने की जगह भी छोड़ें। बैठने की यह सलाह सुविधा के लिए है; परिवार की किसी विशेष पूजा-विधि में अलग क्रम हो तो उसी अनुसार बैठें।
स्रोत
- उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय: महालक्ष्मी पूजन, इकाई 5, पृष्ठ 61 — शाम के महालक्ष्मी पूजन और पूर्व या उत्तर की ओर मुख करने का निर्देश।
- श्रीमद्भागवत 11.27.19: अनुवाद और व्याख्या — पूजा करने वाले की दिशा और स्थायी रूप से स्थापित प्रतिमा के सामने बैठना।
- शिवपुराण, विद्येश्वरसंहिता, अध्याय 21, श्लोक 53 — रात्रि के देवकार्य में उत्तर की ओर मुख करने का संदर्भ।
- मत्स्यपुराण, अध्याय 256, श्लोक 33 — ईशान में देवस्थान का उल्लेख।
- Apple: फोन में कंपास का उपयोग — फोन सपाट पकड़ना और चुंबकीय व्यवधान संबंधी सावधानी।

Diwali Puja Kit
लक्ष्मी–गणेश पूजा की 31 सामग्री एक व्यवस्थित किट में। चौकी और आसन लगाने के बाद सामग्री को पूजा-क्रम के अनुसार पास रखें।

