दीवाली पूजा में कलश कहाँ रखें? लक्ष्मी-गणेश के पास रखने का तरीका
दीवाली पूजा में जल से भरा कलश रखने का एक तरीका यह है: लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों के सामने बैठें और कलश अपने बाएँ हाथ की तरफ रखें। यहाँ बाईं तरफ पूजा करने वाले की है। यह एक पूजा-विधि का निर्देश है; घर में अलग परंपरा हो तो उसी के अनुसार रखें।
नारियल वाले कलश की स्थापना का स्थान इस निर्देश में नहीं बताया गया है। उसके लिए घर की स्थापना-विधि अपनाएँ। पूजा कराने वाले पंडित जी से चौकी सजाते समय उसकी जगह दिखवा लें।
दाएँ-बाएँ का अंतर समझेंअपने बाएँ और लक्ष्मी जी के दाएँ में क्या अंतर है?
आप मूर्ति के सामने बैठते हैं तो आपका और मूर्ति का मुख आमने-सामने होता है। इसलिए लक्ष्मी जी की दाईं तरफ आपके बाएँ हाथ की ओर होगी। लक्ष्मी जी की बाईं तरफ आपके दाएँ हाथ की ओर होगी।
मान लें, आपको कलश लक्ष्मी जी की दाईं तरफ रखने को कहा गया है। तब मूर्ति के सामने बैठकर उसे अपने बाएँ हाथ वाली तरफ रखेंगे। यह उदाहरण दाएँ-बाएँ का अंतर बताता है, कलश रखने का अलग धार्मिक नियम नहीं।
कलश और मूर्तियों के बीच कितनी जगह छोड़ें?
बैठकर हाथ बढ़ाएँ
तिलक और फूल चढ़ाने की दूरी पूजा शुरू होने से पहले जाँचें।
इतनी जगह छोड़ें कि तिलक लगाते और फूल चढ़ाते समय हाथ कलश से न टकराए। जगह जाँचने के लिए अपने आसन पर बैठें और मूर्तियों तक हाथ बढ़ाकर देखें। दीपक जलाने से पहले यह काम कर लें।
नारियल या पत्तों से लक्ष्मी-गणेश के चेहरे ढक रहे हों तो चौकी पर जगह कम पड़ रही है। अतिरिक्त सजावट हटाएँ या बड़ी चौकी लें। केवल सब सामान समेटने के लिए कलश को किनारे पर न टिकाएँ।
चौकी की सामग्री पहले से तैयार रखें
कलश, दीपक, रोली, अक्षत और पूजा की बाकी आवश्यक सामग्री एक साथ देखें।
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छोटी चौकी पर कलश कैसे टिकाएँ?
तला और कपड़ा
कलश का पूरा तला चौकी पर होना चाहिए। नीचे बिछा कपड़ा सीधा करें, ताकि उसकी मोटी तह से कलश एक ओर न झुके। कलश रखने के बाद देखें कि वह डगमगा तो नहीं रहा।
नारियल रखने के बाद
यदि आपके पूजन में नारियल रखा जाता है, तो उसे रखने के बाद भी जाँचें। नारियल एक तरफ खिसक रहा हो तो उसे गिरने की स्थिति में छोड़कर पूजा शुरू न करें। कलश को मूर्ति या दीवार के सहारे टिकाकर उसका झुकाव न छिपाएँ।
थाली उठाकर देखें
पास रखी थाली उठाकर भी देखें। थाली का किनारा कलश से टकराता हो तो दोनों के बीच जगह बढ़ाएँ। पूजा में बार-बार उठाने वाली चीजें हाथ की पहुँच में रखें।
कलश के पास दीपक और पूजा की थाली कहाँ रखें?
दीपक
दीपक ऐसे रखें कि उसकी लौ नारियल के रेशों, मौली और कपड़े से दूर रहे। दीपक तक हाथ पहुँचाने के लिए कलश के ऊपर से बाँह न ले जानी पड़े। आरती की थाली घुमाने के लिए भी सामने जगह छोड़ें।
छोटी पूजा थाली
रोली, चावल और फूल की छोटी थाली अपने पास रखें। सामग्री के पैकेट, अतिरिक्त फूल और प्रसाद की बड़ी थालियाँ पास की मेज पर रख सकते हैं। इससे मुख्य चौकी पर कलश और मूर्तियों के लिए जगह बचेगी।
पंचपात्र
पंचपात्र इस्तेमाल कर रहे हों तो उसे पहचान लें। यह पूजा में जल लेने का छोटा बर्तन है, जिसके साथ चम्मच रहती है। ऊपर बताई गई पूजा-व्यवस्था में इसे अपने सामने रखा जाता है।
क्या बाईं तरफ रखने से कलश उत्तर-पूर्व में आ जाएगा?
नहीं। बाईं तरफ आपके मुख की दिशा के साथ बदलती है। उत्तर-पूर्व एक निश्चित दिशा है, जिसे ईशान कोण भी कहते हैं।
पूर्व की ओर मुख करके बैठेंगे तो आपके बाएँ उत्तर होगा। उत्तर की ओर मुख करके बैठेंगे तो बाएँ पश्चिम होगा। इसलिए “अपने बाएँ” और “उत्तर-पूर्व में” एक ही निर्देश नहीं हैं।
कमरे का उत्तर-पूर्व कोना और चौकी का उत्तर-पूर्व कोना भी अलग जगहें हैं। पूजा-स्थान के लिए बताई दिशा को चौकी पर कलश रखने की दिशा न मानें।
पूजा शुरू करने से पहले क्या जाँचें?
अपने आसन पर बैठकर एक बार चौकी देखें। इन चार बातों की जाँच कर लें:
इन बातों से पूजा के बीच सामान हटाने की जरूरत कम होगी। दिशा और स्थापना का धार्मिक निर्देश अपनी पूजा-विधि से लें; चौकी पर जगह इन व्यावहारिक बातों के अनुसार बनाएँ।

