दिवाली पूजा सामग्री की सूची और पूजन में हर वस्तु का उपयोग
दिवाली पूजा सामग्री (Diwali Puja Samagri) जुटाने से पहले हर वस्तु का उपयोग जान लें। सूची की हर वस्तु सभी घरों की पूजा में नहीं लगती। अपने परिवार की पूजा विधि के अनुसार तैयारी करें।
नीचे लक्ष्मी गणेश पूजन की सूची और हर वस्तु की मात्रा दी गई है। आगे पूजा के अलग चरणों में उसका उपयोग बताया गया है। साथ में अलग से जुटाने वाला सामान, दिवाली 2026 की तिथि और स्थानीय मुहूर्त भी दिए गए हैं।
दिवाली पूजा सामग्री की सूची
लक्ष्मी पूजा सामग्री की इस सूची में तिलक, पुष्प अर्पण, भोग और आरती की वस्तुएँ हैं। हर वस्तु के सामने उसकी मात्रा दी गई है।
घर में उपलब्ध सामान को सूची से मिलाकर बाकी सामग्री जुटाएँ। ताजे फूल, दूर्वा, पान, फल और पूजन के बर्तन अगली सूची में दिए गए हैं।
पूजन के चिह्न तिलक और वस्त्र
जल सुगंध और भोग की सामग्री
दीप और आरती की सामग्री
घर की परंपरा के अनुसार रखी जाने वाली सामग्री

दिवाली पूजा किट की सामग्री देखें
किट में मौजूद सामग्री को ऊपर दी गई सूची से मिलाएँ और केवल बाकी जरूरी वस्तुएँ अलग से जुटाएँ।
दिवाली पूजा किट खरीदेंपूजा के लिए अलग से क्या जुटाएँ
लक्ष्मी गणेश पूजा सामग्री जुटाते समय नीचे दिया ताजा सामान भी तैयार करें। घर में मौजूद साफ चौकी, थाली और कटोरियाँ इस्तेमाल कर सकते हैं।
ताजे अर्पण और भोग
पूजन स्थान और बर्तन
धन का पूजन करने के लिए
दिवाली पूजा की तैयारी में सामग्री कैसे रखें
दिवाली पूजा सामग्री को तिलक, जल अर्पण, भोग और आरती के अनुसार अलग रखें। रोली, चंदन और अक्षत छोटी कटोरियों में निकालें। जल के पात्र पास रखें और भोग के लिए अलग थाली लें।
दीये जलाने से पहले उनकी बत्ती और घी या तेल तैयार करें। फूल, दूर्वा और पान पूजा शुरू होने से पहले पास रखें। धूप और कपूर जलाने के पात्र भी तैयार रखें।
दिवाली पूजा में क्या किया जाता है
दिवाली पर लक्ष्मीजी का स्वागत करके तिलक, फूल, भोग और दीप अर्पित किए जाते हैं। पूजा के अंत में आरती होती है। स्कन्दपुराण में भी अमावस्या की रात लक्ष्मी पूजा और दीप जलाने का उल्लेख है।
पूजा में लक्ष्मीजी से अन्न, धन और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें। श्रीसूक्त में भी लक्ष्मीजी से अन्न और धन की कामना की गई है।
लक्ष्मी पूजन से पहले गणेश पूजा का विधान
शिवपुराण में गणेशजी को अन्य देवताओं से पहले पूजे जाने का आशीर्वाद मिला है। उनसे पूजा में बाधाएँ दूर करने की प्रार्थना की जाती है। लक्ष्मी गणेश पूजा में इसी क्रम से पहले गणेशजी और फिर लक्ष्मीजी का पूजन होता है।
दिवाली पूजा 2026 की तिथि और मुहूर्त
भारत में दिवाली का मुख्य लक्ष्मी पूजन रविवार 8 नवंबर 2026 को है। नई दिल्ली का लक्ष्मी पूजा मुहूर्त शाम 5 बजकर 54 मिनट से 7 बजकर 50 मिनट तक है।
यह भारतीय समयानुसार नई दिल्ली का मुहूर्त है। दूसरे शहर में पूजा करने पर वहाँ का स्थानीय समय देखें।
स्वागत और स्नान में जल का उपयोग
चरण धोने के लिए देवता को अर्पित जल पाद्य कहलाता है। सम्मान के लिए अर्पित जल को अर्घ्य कहते हैं। मुख की शुद्धि के लिए चढ़ाया जल आचमनीय है। इन तीनों के लिए अलग कटोरियाँ रखें।
गंगाजल का उपयोग अर्घ्य में होता है। देवीभागवत में लक्ष्मीजी के अर्घ्य में गंगाजल, फूल, चंदन और दूर्वा का उल्लेख है।
दूध, दही, घी, शहद और चीनी से पंचामृत बनता है। आपके घर की विधि में पंचामृत स्नान हो तो इसे तैयार करें।
जल या पंचामृत से स्नान धुल सकने वाली प्रतिमा को ही कराएँ। मिट्टी की प्रतिमा और कागज के चित्र को साफ कपड़े से पोंछें। भागवत में प्रतिमा के प्रकार के अनुसार स्नान या पोंछकर सफाई बताई गई है।
गुलाब जल को सुगंधित जल के रूप में अर्पित किया जा सकता है। आपकी पूजा विधि में इसका अर्पण हो तो इसे अलग कटोरी में रखें।
तिलक और वस्त्र अर्पण में सामग्री का उपयोग
रोली से तिलक करें और चंदन सुगंधित लेप के रूप में चढ़ाएँ। देवीभागवत में लक्ष्मीजी को चंदन अर्पित किया गया है। सिंदूर गणेशजी को भी चढ़ाया जाता है। शिवपुराण में उनके सिंदूर पूजन का उल्लेख है।
अक्षत बिना टूटे चावल के दाने हैं। भागवत में इन्हें चंदन, फूल, धूप और दीप के साथ अर्पित किया गया है।
जनेऊ को यज्ञोपवीत भी कहते हैं। देवपूजन में इसे वस्त्र के साथ पवित्र धागे के रूप में अर्पित किया जाता है। आपके घर की पूजा में इसे चढ़ाया जाता हो तो तैयार रखें।
देवता को वस्त्र उनके श्रृंगार के लिए अर्पित किए जाते हैं। देवीभागवत में लक्ष्मीजी को सूती और रेशमी वस्त्र चढ़ाने का उल्लेख है। कुछ लक्ष्मी पूजा विधियों में छोटे वस्त्र की जगह मौली चढ़ाई जाती है। चौकी पर बिछाने वाला लाल कपड़ा इस अर्पण से अलग रखें।
देवता के अनुसार पुष्प अर्पण
लक्ष्मी पूजा के लिए फूल चुनते समय ताजे मौसमी फूल लें। देवीभागवत में भी लक्ष्मीजी को मौसम के फूलों की माला अर्पित की गई है।
श्रीसूक्त में लक्ष्मीजी को कमल पर विराजमान बताया गया है। इसलिए उनके पूजन में कमल चढ़ाया जाता है। कमल न मिले तो दूसरे ताजे मौसमी फूल अर्पित कर सकते हैं।
दूर्वा गणेशजी को चढ़ाने के लिए रखें। शिवपुराण में गणेश पूजन में दूर्वा अर्पित करने का उल्लेख है। बिल्वपत्र या बिल्वफल तभी जोड़ें जब आपके घर की लक्ष्मी पूजा में ये चढ़ाए जाते हों।
सुगंध और दीप अर्पण का महत्व
धूप बत्ती जलाकर देवता को धूप अर्पित करें। इत्र का उपयोग सुगंध अर्पित करने के लिए होता है। देवीभागवत में लक्ष्मीजी को धूप और सुगंध चढ़ाने का उल्लेख है।
मिट्टी के दीये में रुई की बत्ती रखें। घर की परंपरा के अनुसार उसमें घी या तिल का तेल डालकर दीप जलाएँ।
देवीभागवत में दीप को अंधकार दूर करने वाला बताकर अर्पित किया गया है। स्कन्दपुराण के दिवाली प्रसंग में लक्ष्मीजी को दीप की ज्योति में स्थित कहकर प्रणाम किया गया है। दीप जलाने के साथ उसकी ज्योति को भी नमस्कार करें।
आरती के लिए कपूर जलाएँ और घंटी बजाएँ। दीप, धूप और कपूर जलाने के लिए माचिस पास रखें।
लक्ष्मी पूजा में भोग क्या चढ़ाएँ
लक्ष्मीजी के भोग में खील, बताशा, पंचमेवा, मिश्री, फल और मिठाई रख सकते हैं। देवता के लिए तैयार भोजन को नैवेद्य या भोग कहते हैं। अर्पित करने के बाद यही भोजन प्रसाद के रूप में बाँटा जाता है।
देवीभागवत में अन्न को जीवन का आधार बताकर लक्ष्मीजी को भोजन अर्पित किया गया है। उसमें दूध, चावल और चीनी से बने परमान्न का भी उल्लेख है। यह खीर जैसा मीठा पकवान है।
लौंग और इलायची मीठे पकवान को सुगंध देने में काम आती हैं। स्कन्दपुराण के दिवाली प्रसंग में दोनों से सुगंधित दूध के पकवान का भोग मिलता है।
भोग के बाद देवता को जल अर्पित करें। इसके बाद पान के पत्ते और सुपारी का ताम्बूल चढ़ाएँ। ताम्बूल भोजन के बाद दिया जाने वाला अर्पण है।
पूजन में चिह्न और धन का उपयोग
लक्ष्मी यंत्र लक्ष्मीजी की और कुबेर यंत्र कुबेर की उपासना के लिए है। घर में यंत्र पूजन हो तो इन्हें चौकी पर रखें। दोनों का पूजन उनकी अलग विधि से करें।
चरण पादुका देवता के चरणों के प्रतीक के रूप में रखें। स्वस्तिक पूजन स्थान पर शुभ चिह्न के रूप में बनाया जाता है। तैयार स्वस्तिक भी इसी उपयोग के लिए रखें।
चाँदी का सिक्का, दूसरे सिक्के और रुपये लक्ष्मीजी के धन स्वरूप के पूजन में रख सकते हैं। इसे द्रव्यलक्ष्मी पूजन कहते हैं। इसके लिए कोई एक तय राशि नहीं है।
घर की परंपरा में उपयोग होने वाले अर्पण
कुछ परिवार हल्दी, साबुत धनिया और कमलगट्टा पूजित धन के साथ रखते हैं। गोमती चक्र और कौड़ी भी घर में प्रचलित हों तो पूजा में रखें। ये हर परिवार की लक्ष्मी पूजा में अनिवार्य नहीं हैं।
कमलगट्टे के खुले बीज धन पूजन में रखने की परंपरा कुछ परिवारों में है। कमलगट्टे की माला का उपयोग मंत्रों के जप में होता है। खुले बीज और तैयार जपमाला के उपयोग अलग हैं।
सरसों, जीरा और जौ तभी चढ़ाएँ जब आपके घर की विधि में इनका उपयोग हो। सूची में शामिल होने से इन्हें भोग में मिलाना जरूरी नहीं हो जाता।
देवीभागवत में जौ के आटे से बने मीठे पकवान का उल्लेख है। यह साबुत जौ चढ़ाने या जौ उगाने का निर्देश नहीं है।
लक्ष्मी पोटली की 21 वस्तुएँ देखें
पूजा में कौड़ी, गोमती चक्र, कमलगट्टा और दूसरी सूखी सामग्री शामिल हो तो पोटली की वस्तुओं और मात्राओं को अपनी सूची से मिलाएँ।
लक्ष्मी पोटली खरीदेंपूजा की तैयारी में सामग्री से जुड़ी गलतियाँ
प्रतिमा की बनावट देखे बिना स्नान कराना
मिट्टी की प्रतिमा या कागज के चित्र पर जल और पंचामृत डालने से वे खराब हो सकते हैं। इन्हें साफ कपड़े से पोंछें।
भोग में तिलक की सामग्री मिलाना
फल, मिठाई और खाने वाले दूसरे अर्पण अलग थाली में रखें। रोली, सिंदूर और आरती का कपूर इनमें न मिलाएँ। यही भोजन बाद में प्रसाद के रूप में बाँटा जाएगा।
चौकी के कपड़े को देवता का वस्त्र मान लेना
चौकी का कपड़ा प्रतिमा और सामग्री रखने के लिए है। देवता को चढ़ाने के लिए अलग छोटा वस्त्र रखें। आपकी विधि में मौली को वस्त्र का प्रतीक मानते हों तो उसका उपयोग करें।
ताजा सामान और दीयों की गिनती भूलना
फूल, दूर्वा, पान और फल पूजा से पहले जुटाएँ। घर में जलाने वाले दीये गिनें और सूची के दो दीयों से अधिक लगें तो अलग रखें।
दूसरे शहर का मुहूर्त अपना लेना
ऊपर दिया मुहूर्त नई दिल्ली का है। अपने शहर के लिए वहाँ का लक्ष्मी पूजा समय देखें।
बची हुई दिवाली पूजा सामग्री कैसे रखें
अर्पित फल, मिठाई, खील और बताशे प्रसाद के रूप में बाँटें। प्रसाद में रंग या आरती का कपूर मिला हो तो उसे खाने के लिए न दें।
इस्तेमाल न हुआ घी, तेल और सूखी सामग्री ढककर अगली पूजा के लिए रखें। पूजित यंत्र और सिक्के पूजन स्थान या तिजोरी में रखें, जैसा आपके घर में प्रचलित हो।
पूजा सामग्री से जुड़े सामान्य सवाल
क्या कमल के बिना लक्ष्मी पूजा कर सकते हैं
हाँ, दूसरे ताजे मौसमी फूल अर्पित कर सकते हैं। देवीभागवत में लक्ष्मीजी को मौसम के फूलों की माला अर्पित की गई है।
क्या हर साल नया चाँदी का सिक्का चाहिए
नहीं, हर साल नया सिक्का खरीदना जरूरी नहीं है। घर में पहले से पूजित चाँदी का सिक्का धन पूजन में रख सकते हैं।
घर में जलाने के लिए कितने दीये जुटाएँ
दीयों की संख्या पूजा विधि और घर में दीप जलाने की व्यवस्था के अनुसार बदलती है। प्रवेश द्वार और घर के दूसरे स्थानों के लिए दीये अलग जुटाएँ।
क्या हर वस्तु के बिना पूजा अधूरी होगी
नहीं, हर वस्तु सभी परिवारों की पूजा में अनिवार्य नहीं है। आपके घर की पूजा में जो अर्पण चढ़ाए जाते हैं, उन्हें पहले तैयार करें।


