दीवाली पूजा मंत्र मार्गदर्शिका

दीवाली पूजा मंत्र: लक्ष्मी-गणेश पूजन के मंत्र और हिंदी अर्थ

दीवाली पूजा में गणेश जी का स्मरण करने के लिए ॐ गं गणपतये नमः पढ़ें। लक्ष्मी जी को नमस्कार करने का छोटा मंत्र ॐ श्रीमहालक्ष्म्यै नमः है। फूल, धूप, दीप और भोग चढ़ाते समय उनके अर्पण-वाक्य बोलें। हर मंत्र के साथ हिंदी अर्थ और उसे पढ़ते समय करने वाली क्रिया दी गई है।

आप गणेश गायत्री, लक्ष्मी गायत्री और श्रीसूक्त की चुनी हुई ऋचाएँ भी पढ़ सकते हैं। ये अतिरिक्त पाठ हैं। अपने घर की पूजा के अनुसार इन्हें शामिल करें।

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गणेश पूजा के मंत्र

गणेश जी का ध्यान करके पूजन शुरू करें। पहले उनका छोटा मंत्र पढ़ें, फिर वक्रतुण्ड प्रार्थना करें।

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गणेश जी का छोटा मंत्र

ॐ गं गणपतये नमः।

हिंदी भावार्थ: भगवान गणपति को नमस्कार है।

इस मंत्र में गं गणेश जी का बीजाक्षर है। इसका अलग हिंदी अर्थ नहीं दिया जाता। गणपतये नमः में गणपति को नमस्कार किया जाता है।

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वक्रतुण्ड महाकाय प्रार्थना

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

हिंदी अर्थ: हे वक्र सूँड़ और विशाल शरीर वाले देव! आप करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी हैं। मेरे सभी कार्य सदा बिना बाधा के पूरे हों।

गणेश जी के सामने हाथ जोड़कर यह प्रार्थना करें। इसमें अपने कार्यों की बाधाएँ दूर करने की विनती है।

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गणेश गायत्री मंत्र

गणेश जी के ध्यान के समय यह मंत्र भी पढ़ सकते हैं। इसे अतिरिक्त पाठ के रूप में शामिल करें।

एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि।
तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥

हिंदी भावार्थ: हम एक दाँत वाले भगवान गणेश को जानें। उनके वक्र सूँड़ वाले रूप का ध्यान करें। वे हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।

महालक्ष्मी आराधना

लक्ष्मी पूजा के मंत्र

लक्ष्मी जी का ध्यान करके उन्हें नमस्कार करें। इसके बाद उनकी स्तुति पढ़ें।

1

लक्ष्मी जी का छोटा मंत्र

ॐ श्रीमहालक्ष्म्यै नमः।

हिंदी अर्थ: श्री महालक्ष्मी को नमस्कार है।

मंत्र में महालक्ष्म्यै शब्द पूरा पढ़ें। इसका अर्थ महालक्ष्मी को है। यहाँ श्री लिखा है; इसे पढ़ते समय अपनी ओर से श्रीं में न बदलें।

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महालक्ष्मी की स्तुति

नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते।
शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

हिंदी भावार्थ: हे महामाया! आप श्रीपीठ पर विराजमान हैं और देवता आपकी पूजा करते हैं। आपके हाथों में शंख, चक्र और गदा हैं। हे महालक्ष्मी, आपको नमस्कार है।

यह महालक्ष्मी अष्टकम् का पहला श्लोक है। पूरे अष्टकम् में आठ मुख्य स्तुति-श्लोक हैं।

इस श्लोक में महालक्ष्मि कहकर देवी को पुकारा गया है। इसलिए यहाँ ‘महालक्ष्मि’ और छोटे मंत्र में ‘महालक्ष्म्यै’ पढ़ें।

3

लक्ष्मी गायत्री मंत्र

लक्ष्मी जी का ध्यान करते हुए यह गायत्री मंत्र भी पढ़ सकते हैं। इसका भाव देवी से बुद्धि को प्रेरित करने की प्रार्थना है।

महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि।
तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥

हिंदी भावार्थ: हम महालक्ष्मी को जानें और भगवान विष्णु की पत्नी का ध्यान करें। वे लक्ष्मी हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।

श्रीसूक्त की चुनी हुई ऋचाएँ और हिंदी अर्थ

लक्ष्मी की स्तुति में श्रीसूक्त भी पढ़ा जाता है। यहाँ उसकी दो ऋचाएँ, यानी मंत्र-पंक्तियाँ, दी गई हैं। यह संपूर्ण श्रीसूक्त नहीं है।

1

लक्ष्मी के आवाहन की प्रार्थना

हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥

हिंदी भावार्थ: हे अग्निदेव! मेरे लिए स्वर्ण जैसी चमक वाली लक्ष्मी का आवाहन करें। वे हरिणी के समान चपल, सोने-चाँदी की मालाओं से सजी और चंद्रमा जैसी उज्ज्वल हैं।

यहाँ जातवेदो कहकर अग्निदेव को पुकारा गया है। उनसे लक्ष्मी जी को पूजा में आमंत्रित करने की प्रार्थना की जाती है।

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सत्य वाणी, अन्न और समृद्धि की प्रार्थना

मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि।
पशूनां रूपमन्नस्य मयि श्रीः श्रयतां यशः॥

हिंदी भावार्थ: हमारे मन की इच्छाएँ और संकल्प पूरे हों। हमारी वाणी में सत्य हो। हमें पशुधन और अन्न की संपन्नता मिले। हमारे जीवन में समृद्धि और यश रहें।

इस प्रार्थना में धन के साथ अन्न और सत्य बोलने की कामना भी है। लक्ष्मी से अपने परिवार के पालन-पोषण और अच्छे जीवन की प्रार्थना करते समय इसका भाव ध्यान में रखें।

फूल चढ़ाते समय क्या बोलें?

गणेश जी और लक्ष्मी जी को फूल अर्पित करने के वाक्य अलग हैं। जिस देवता को फूल चढ़ाएँ, उसी का वाक्य पढ़ें।

गणेश जी को फूल चढ़ाते समय:
ॐ श्री महागणपतये नमः। पुष्पाणि समर्पयामि।
लक्ष्मी जी को फूल चढ़ाते समय:
ॐ श्रीमहालक्ष्म्यै नमः। पुष्पाणि समर्पयामि।

हिंदी अर्थ: आपको नमस्कार है। मैं फूल अर्पित करता/करती हूँ।

वाक्य पढ़ते हुए फूल देवता के चरणों में रखें। पुष्पाणि का अर्थ फूल और समर्पयामि का अर्थ मैं अर्पित करता/करती हूँ है।

धूप और दीप दिखाने के मंत्र

धूप दिखाने और दीप दिखाने के वाक्य अलग हैं। पूजा में दोनों चरणों पर उनका अपना वाक्य पढ़ें।

चरण 1

धूप दिखाते समय

गणेश जी के लिए:
ॐ श्री महागणपतये नमः। धूपमाघ्रापयामि।
लक्ष्मी जी के लिए:
ॐ श्रीमहालक्ष्म्यै नमः। धूपमाघ्रापयामि।

हिंदी भावार्थ: आपको नमस्कार है। मैं धूप की सुगंध अर्पित करता/करती हूँ।

यह वाक्य बोलते हुए देवता को धूप दिखाएँ। धूपमाघ्रापयामि में धूप की सुगंध अर्पित करने का भाव है।

चरण 2

दीप दिखाते समय

गणेश जी के लिए:
ॐ श्री महागणपतये नमः। दीपं दर्शयामि।
लक्ष्मी जी के लिए:
ॐ श्रीमहालक्ष्म्यै नमः। दीपं दर्शयामि।

हिंदी अर्थ: आपको नमस्कार है। मैं दीप दिखाता/दिखाती हूँ।

मंत्र पढ़ते हुए देवता को दीप दिखाएँ। यह पूजा में दीप अर्पित करने का वाक्य है; आरती का गीत अलग है।

भोग लगाने का मंत्र

फल, मिठाई या तैयार भोजन देवता के सामने रखें। गणेश जी और लक्ष्मी जी का नाम लेकर भोग अर्पित करें।

गणेश जी को भोग लगाते समय:
ॐ श्री महागणपतये नमः। नैवेद्यं समर्पयामि।
लक्ष्मी जी को भोग लगाते समय:
ॐ श्रीमहालक्ष्म्यै नमः। नैवेद्यं समर्पयामि।

हिंदी अर्थ: आपको नमस्कार है। मैं भोजन अर्पित करता/करती हूँ।

नैवेद्य देवता को अर्पित किया जाने वाला भोजन है। इसलिए भोजन अर्पित करने के इस चरण में नैवेद्य वाला वाक्य पढ़ें।

अतिरिक्त पाठ

भोग के समय पढ़े जाने वाले अतिरिक्त मंत्र

यदि आपके घर में भोग के साथ ये मंत्र पढ़े जाते हैं, तो भोजन अर्पित करते हुए इन्हें पढ़ें। इनमें पाँच प्राणों और ब्रह्म को अर्पण का भाव है।

ॐ प्राणाय स्वाहा।
ॐ अपानाय स्वाहा।
ॐ व्यानाय स्वाहा।
ॐ उदानाय स्वाहा।
ॐ समानाय स्वाहा।
ॐ ब्रह्मणे स्वाहा।

प्राण, अपान, व्यान, उदान और समान पाँच प्राणों के नाम हैं। ये मंत्र यहाँ भोग अर्पित करने के लिए हैं। इस चरण में अग्नि में आहुति नहीं दी जाती।

प्रकाश की प्रार्थना

आरती के समय की प्रार्थना

लक्ष्मी जी और गणेश जी की वह आरती गाएँ जो आपके घर में पढ़ी जाती है। आरती के साथ नीचे की प्रार्थना भी पढ़ सकते हैं।

न तत्र सूर्यो भाति न चन्द्रतारकं
नेमा विद्युतो भान्ति कुतोऽयमग्निः।
तमेव भान्तमनुभाति सर्वं
तस्य भासा सर्वमिदं विभाति॥

हिंदी भावार्थ: सूर्य, चंद्रमा, तारे और बिजली भी उस परमात्मा को प्रकाशित नहीं कर सकते। फिर यह अग्नि उसे कैसे प्रकाशित करेगी? उसी के प्रकाश से सब प्रकाशित होता है।

यह परमात्मा के प्रकाश की प्रार्थना है। इसे आरती के समय अतिरिक्त पाठ के रूप में पढ़ें।

पूजा का समापन

पूजा के अंत में क्षमा-प्रार्थना

पूजा समाप्त होने पर हाथ जोड़कर देवी से भूलों की क्षमा माँगें। यह प्रार्थना पढ़ें:

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वरि॥

हिंदी भावार्थ: हे परमेश्वरी! मैं आपको पूजा में आमंत्रित करने, विदा करने और पूजन की विधि ठीक से नहीं जानता/जानती। मेरी भूल क्षमा करें।

यहाँ अपनी पूजा की कमियों के लिए क्षमा माँगी जाती है। इस श्लोक को पढ़ना मूर्ति को पानी में विसर्जित करने का निर्देश नहीं है।

दीवाली पूजा मंत्रों से जुड़े सवाल

मंत्र याद न हों तो क्या करें?

आप मंत्र देखकर पढ़ सकते हैं। गणेश जी और लक्ष्मी जी के छोटे मंत्रों से स्मरण करें और सामग्री चढ़ाते समय उसका अर्पण-वाक्य पढ़ें।

किसी शब्द में कठिनाई हो तो उसका उच्चारण पहले सुन लें। श्रीसूक्त का स्वर सहित पाठ सीखने के लिए प्रशिक्षित पाठक से अभ्यास करें।

क्या हर मंत्र 108 बार पढ़ना जरूरी है?

हर मंत्र को 108 बार पढ़ना जरूरी नहीं है। फूल या भोग चढ़ाने का वाक्य उस अर्पण से जुड़ा है, जबकि जप में मंत्र दोहराया जाता है।

यदि आपने किसी विशेष जप का संकल्प लिया है, तो उसकी तय संख्या अपनाएँ। सभी प्रार्थनाओं और अर्पण-वाक्यों पर एक ही संख्या लागू न करें।

क्या हिंदी में भी प्रार्थना कर सकते हैं?

हाँ, आप अपनी प्रार्थना हिंदी में भी कह सकते हैं। जैसे, “हे लक्ष्मी माँ, हमारे घर में अन्न की कमी न हो और हम अपनी कमाई का अच्छा उपयोग करें।”

हिंदी अर्थ मंत्र का भाव समझने में मदद करता है। संस्कृत पाठ करते समय मूल शब्द पढ़ें और अपनी प्रार्थना अलग से कहें।

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